वैदिक साहित्य का इतिहास , वैदिक चिन्तन बहुविकल्पीय प्रश्न

प्रिय विद्यार्थियों, इस पोस्ट में वैदिक साहित्य का इतिहास , वैदिक चिन्तन बहुविकल्पीय प्रश्न है। जो संस्कृत की विविध प्रतियोगी परिक्षाओं NET JRF, TGT PGT तथा विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Q1. वेदविषये असत्यं विद्यते ? [RPSC AP YAJURVEDA 2024]

क). एषः अपौरुषेयः

ख). मन्त्रब्राह्मणयोः वेदसंज्ञा भवति

ग). वेदव्यासेन वेदानां विभागः कृतः

घ). वेदाः अनिष्टसाधकाः

✅ सही उत्तर:- घ). वेदाः अनिष्टसाधकाः

Q2. ऋग्वेदसंहितायाः प्रथमः प्रवचनकर्ता क आसीत् ?

क). महर्षिः व्यासः

ख). बाष्कलः

ग). पैलः

घ). अङ्गिरा

✅ सही उत्तर:- ग). पैलः

वेदों के प्रमुख विषय-

वेद ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद
उपवेद आयुर्वेद धनुर्वेद गान्धर्ववेद स्थापत्यवेद
ऋषि अग्नि वायु आदित्य अङ्गिरा
ऋत्विज होता अध्वर्यु उद्गाता ब्रह्मा
प्रथमअध्येता पैल वैशम्पायन जैमिनि सुमन्तु
वर्ण्य विषय शस्त्र यज्ञ स्तुतिस्तोम प्रायश्चित
वेदप्रतीक शरीर मन बुद्धि आत्मा
देवता अग्नि वायु सूर्य सोम
तत्व वाक्तत्व मनस्तत्व प्राणतत्व
लोक भूलोक अन्तरिक्ष द्युलोक

Q3. कृष्णयजुर्वेदस्य संहिता नास्ति -[RPSC AP SANSKRIT II 2025]

क). तैत्तिरीय-संहिता

ख). मैत्रायणी-संहिता

ग). कपिष्ठल-संहिता

घ). वाजसनेयि-संहिता

✅ सही उत्तर:- घ). वाजसनेयि-संहिता

Q4. वेदस्य ऋत्विक् सन्दर्भे समीचीनमस्ति -[RPSC AP SANSKRIT II 2025]

क). होता अथर्ववेदस्य

ख). उद्गाता ऋग्वेदस्य

ग). अध्वर्युः यजुर्वेदस्य

घ). ब्रह्मा सामवेदस्य

✅ सही उत्तर:- ग). अध्वर्युः यजुर्वेदस्य

होता – ऋग्वेद
अध्वर्यु – यजुर्वेद
ब्रह्मा – अथर्ववेद
उद्गाता – सामवेद

Q5. ऋग्वेदसंहितायाः विभाजनं कतिधा कृतम् ?

क). अष्टक – छन्दोभ्यां द्विधा

ख). अनुवाक् – सूक्ताभ्यां द्विधा

ग). अष्टक – मण्डलक्रमाभ्यां द्विधा

घ). अष्टक – बालखिल्याभ्यां द्विधा

✅ सही उत्तर:- ग). अष्टक – मण्डलक्रमाभ्यां द्विधा

ऋग्वेद विभाजन के दो प्रकार-

1). अष्टक अध्याय वर्ग और मंत्र
2). मंडल अनुवाक सूक्त मंत्र।

  1. अष्टक क्रम-

पूरे वेद में आठ भाग हैं जिन्हें (अष्टक) कहा जाता है। प्रत्येक अष्टक में आठ अध्याय हैं। इस प्रकार ऋग्वेद में सम्पूर्ण (64) अध्याय है। प्रत्येक अध्याय में वर्गों की संख्या भिन्न है। अष्टकों में वर्गों की संख्या लगभग (221-293) है। (अष्टक 8, अध्याय = 64, वर्ग = 2024, मंत्र =10580,) ऋग्वेद में बालखित्य सूक्तों सहित = 1028 मूक्त हैं।

  1. मण्डलक्रम-

मण्डल = 10, बालखिल्य सूक्त 11+80 मंत्र, अनुवाक=85, सूक्त=1028, मंत्र= 10580

Q6. “एकश्रुतिः” कस्य अपरं नाम उच्यते ?[RPSC SANSKRIT LECTURER YAJURVED 2024]

क). निहितस्वरस्य

ख). प्रचयस्वरस्य

ग). पादवृत्तस्य

घ). जात्यस्थ

✅ सही उत्तर:- ख). प्रचयस्वरस्य

Q7. द्वन्द्वपात्रेषु अग्निहोत्रहवण्याः युग्मं वर्तते -[RPSC SANSKRIT LECTURER YAJURVED 2024]

क). कृष्णाजिनम्

ख). स्फ्यः

ग). शूर्पम्

घ). शम्या

✅ सही उत्तर:- ग). शूर्पम्

नोट – मुख्यतः यह यजुर्वेद का विषय है पुनरपि पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत किया गया है।

Q8. “एकशतमध्वर्युशाखाः” कस्य वचनमिदम् ?[RPSC SANSKRIT LECTURER YAJURVED 2024]

क). पाणिनेः

ख). पतञ्जलेः

ग). कात्यायनस्य

घ). याज्ञवल्क्यस्य

✅ सही उत्तर:- ख). पतञ्जलेः

Q9. शुक्लयजुर्वेदस्य माध्यन्दिनसंहितायां मन्त्रसंख्या कति अस्ति ?

क). 1875

ख). 1975

ग). 2075

घ). 2175

✅ सही उत्तर:- ख). 1975

माध्यन्दिन संहिता/वाजसनेयि संहिता

वाज अन्न, सनि = दानम्।

अध्याय- 40, मंत्र – 1975

यजुर्वेद में अक्षरों की संख्या 2,88,000 (शतपथ ब्रा.)

सौत्रामणि स्तोत्र वाजसनेयी संहिता में है।

इस शाखा पर उपलब्ध भाष्य का नाम है- मातृमोद।

Q10. अथर्ववेदस्य आरण्यकम् अस्ति – [UPPSC AP 2017]

क). कौषीतकि-आरण्यकम्

ख). ऐतरेयम् आरण्यकम्

ग). बृहदारण्यकम्

घ). उपर्युक्तेषु न किमपि

✅ सही उत्तर:- घ). उपर्युक्तेषु न किमपि

कौषीतकि(शांखायन)आरण्यकम् – ऋग्वेद
ऐतरेयम् आरण्यकम् – ऋग्वेद
बृहदारण्यकम् – शुक्ल यजुर्वेद

  • अथर्ववेद का आरण्यक नहीं प्राप्त होता है।
Q11. तैत्तिरीयम् आरण्यकमस्ति -[UPPSC AP 2017]

क). शुक्लयजुर्वेदस्य

ख). ऋग्वेदस्य

ग). कृष्णयजुर्वेदस्य

घ). सामवेदस्य

✅ सही उत्तर:- ग). कृष्णयजुर्वेदस्य

Q12. शतपथब्राह्मणग्रन्थः केन वेदेन सह सम्बद्धोऽस्ति ?

क). ऋग्वेदेन

ख). यजुर्वेदेन

ग). सामवेदेन

घ). अथर्ववेदेन

✅ सही उत्तर:- ख). यजुर्वेदेन

Q13. वेदरचनाया अदितिकालः कः ?

क). 4000-2500

ख). 2500-1400

ग). 6000-4000

घ). 1400-500

✅ सही उत्तर:- ग). 6000-4000

अदिति काल – 6000-4000- निविद् मंत्र (पद्यात्मक-गद्य)

मृगशिरा काल 4000-2500- ऋग्वेद के अधिकांश सूक्त।

कृत्तिका काल -2500-1400 चारों वेदों का संकलन।

अंतिम (सूत्र) काल -1400-1500- सूत्र ग्रन्थ दर्शन ग्रन्थ।

Q14. सामवेदीय तवलकार ब्राह्मणेन संबद्धा उपनिषद् वर्तते –

क). ईशावास्योपनिषद्

ख). केनोपनिषद्

ग). कठोपनिषद्

घ). तैत्तिरीयोपनिषद्

✅ सही उत्तर:- ख). केनोपनिषद्

ईशावास्योपनिषद् – शुक्ल यजुर्वेद वाजसनेयि शाखा
कठोपनिषद् – कृष्ण यजुर्वेद कठ(काठक) शाखा
तैत्तिरीयोपनिषद् – कृष्ण यजुर्वेद तैत्तिरीय शाखा

Q15. यजुर्वेद के माध्यन्दिन शाखा के प्रथम व द्वितीय अध्याय का वर्ण्य विषय है-

क). अग्निचयन

ख). अग्न्याधान

ग). सोमयाग

घ). दर्शपौर्णमासयाग

✅ सही उत्तर:- घ) दर्शपौर्णमासयाग

यजुर्वेद माध्यन्दिन संहिता में प्रमुख अध्यायों के वर्णित विषय –

अध्याय विषय
अध्याय- 1-2 दर्श, पौर्णमास
अध्याय- 3 अग्निहोत्र, चातुर्मास्य।
अध्याय- 4-8 सोमयाग, अग्निष्टोम
अध्याय- 11 अग्निचयन
अध्याय- 15 अग्याधान
अध्याय- 16 रुद्राध्याय (शतरुद्रीय)
अध्याय- 20 अश्विनी कुमार
अध्याय- 22 अश्वमेघ
अध्याय- 23 प्रजापति सूक्त
अध्याय- 30 पुरुषमेघ
अध्याय- 31 पुरुषसूक्त- विष्णुसूक्त
अध्याय- 33 सर्वमेध
अध्याय- 34 शिवसङ्कल्पसूक्त
अध्याय- 35 पितृमेघ
अध्याय- 40 ईशावास्योपनिषद्

आशा है कि आपको वैदिक साहित्य का इतिहास , वैदिक चिन्तन बहुविकल्पीय प्रश्न उपयोगी और जानकारीपूर्ण लगा होगा। ऐसी ही उपयोगी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जुड़े रहें gopath.in & boks.in के साथ आपका सहयोग और विश्वास ही हमारी प्रेरणा है।

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