प्रिय विद्यार्थियों, इस पोस्ट में पुराण बहुविकल्पीय प्रश्न Puran MCQs है। जो संस्कृत की विविध प्रतियोगी परीक्षाओं NET JRF, TGT PGT तथा विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।
नोट – यह पोस्ट आन्तरिक मूल्यांकन के साथ संस्कृत की सभी परीक्षाओं हेतु प्रस्तुत किया जा रहा है।
Q1. उपपुराणानि चिनुत – [UGC NET DEC 2024]
A. शाम्बपुराणम्
B. वायुपुराणम्
C. वारुणपुराणम्
D. मारीचपुराणम्
E. ब्रह्मवैवर्तपुराणम्
अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-
उपपुराण-
| 1. सनत्कुमार | 2. नारसिंह | 3. स्कान्द |
| 4. शिवधर्म | 5. आश्चर्य | 6. नारदीय |
| 7. कापिल | 8. कल्कि | 9. ओशनस |
| 10. ब्रह्माण्ड | 11. वारुण | 12. कालिका |
| 13. माहेश्वर | 14. साम्ब | 15. सौर |
| 16. पाराशर | 17. मारीच | 18. भार्गव |
Q2. भागवतपुराणाभिमतपुराणलक्षणानां क्रमं चिनुत – [UGC NET DEC 2024]
A. वंशानुचरितम्
B. अपाश्रयः
C. वंशः
D. हेतुः
E. संस्था
अधोलिखितविकल्पेषु समुचितमुत्तरं चिनुत-
सर्गोऽस्याथ विसर्गश्च वृत्तिरक्षान्तराणि च।
वंशो वंशानुचरितं संस्था हेतुरपाश्रयः ॥
दशभिर्लक्षणैर्युक्तं पुराणं तद्विदो विदुः।
केचित् पञ्चविधं ब्रह्मन् महदल्पव्यवस्थया ॥श्रीमद्भागवत.12.7.9-10॥
पुराणज्ञ पण्डितोंने पुराण प्रसङ्गमें इस विश्वका प्रकाश (ब्रह्माण्डकी सृस्टि), विसर्ग (लोक एवं जीवोंकी सृष्टि), विश्वके लोगोंकी वृत्ति (पालन-पोषण), भरण (रक्षा), मन्वन्तर (विभिन्न मनुओंका शासनकाल), वंश (महान् राजओंके वंश), वंशानुचरित (राजाओंके कार्यकलाप), संस्था (प्रलय अथवा निरोध), कारण (हेतु-कर्मवासना शब्दसे कही जानेवाली ऊतियाँ) एवं अपाश्रय (आश्रय)- इन दस लक्षणोंसे युक्त शास्त्रको पुराण कहा है। हे मुनिवर ! कोई-कोई दस लक्षणोंसे युक्त शास्त्रको महापुराण एवं पाँच लक्षणों (सृष्टि, गौणसृष्टि या परिसर्ग, राजवंश, मन्वन्तर एवं वंशानुचरित) से युक्त शास्त्रको उपपुराण कहते हैं ॥ ९-१०॥
Q3. वामनपुराणे भगवतः आशुतोषस्य सम्बद्धानि कति स्तोत्राणि लभ्यन्ते ? [UGC NET DEC 2025]
Q4. ब्रह्मवैवर्तपुराणस्य कस्मिन् खण्डे पञ्चप्रकारकाः पुत्राः अभिमताः सन्ति ? [UGC NET DEC 2025]
Q5. अधोलिखितेषु सात्त्विकपुराणद्वयं चेतव्यम् – [UGC NET JUNE 2025]
A. शिवपुराणम्
B. भागवतपुराणम्
C. कालिकापुराणम्
D. विष्णुपुराणम्
अधस्तनेषु समुचितं विकल्पं चिनुत-
Q6. अधस्तनेषु उपपुराणमस्ति- [UGC NET JUNE 2025]
उपपुराण-
| 1. सनत्कुमार | 2. नारसिंह | 3. स्कान्द |
| 4. शिवधर्म | 5. आश्चर्य | 6. नारदीय |
| 7. कापिल | 8. कल्कि | 9. ओशनस |
| 10. ब्रह्माण्ड | 11. वारुण | 12. कालिका |
| 13. माहेश्वर | 14. साम्ब | 15. सौर |
| 16. पाराशर | 17. मारीच | 18. भार्गव |
Q7. निम्नाङ्कितेषु कतमं महापुराणं नास्ति – [HP SET 2018]
Q8. कति महापुराणानि ? [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2022]
मद्वयं भद्वयं चैव बत्रयं वचतुष्टयम्।
अनापलिंगकूस्कानि पुराणानि पृथक्पृथक्” ॥श्रीमद्देवीभागवत. 1.3.2॥
मद्वयम्- 1. मत्स्य पुराण, 2. मार्कण्डेय पुराण।
भद्वयम्- 3. भागवत पुराण, 4. भविष्य पुराण।
ब्रत्रयम्- 5. ब्रह्म पुराण 6. ब्रह्मवैवर्त पुराण 7. ब्रह्माण्ड पुराण।
वचतुष्टयम्- 8. विष्णु पुराण 9. वायु पुराण 10. वाराह पुराण 11. वामन पुराण।
अ- 12. अग्नि पुराण
ना- 13-नारद पुराण
प- 14-पद्म पुराण
लिं- 15-लिङ्ग पुराण
ग- 16-गरुड पुराण
कू- 17-कूर्म पुराण
स्-18-स्कन्द पुराण
Q9. पुराणस्य दशलक्षणानि कस्मिन् पुराणे उक्तानि ? [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2022]
हे शौनकजी ! पुराणज्ञ मुनिगण इन लक्षणोंसे युक्त अठारह उपपुराण एवं अठारह महापुराणोंका निर्णय करते हैं। इनमें कोई-कोई तो क्षुद्र कलेवर हैं और कोई आकारमें बृहत् हैं॥
ब्राह्मं पाद्मं वैष्णवञ्च शैवं लैङ्ग सगारुडम् ।
नारदीयं भागवतमाग्नेयं स्कान्द-संज्ञितम् ॥
भविष्यं ब्रह्मवैवर्तं मार्कण्डेयं सवामनम् ।
वाराहं मात्स्यं कौर्मं च ब्रह्माण्डाख्यमिति त्रिषट् ॥ श्रीमद्भागवत.12.7.22.-24॥
उनके नाम ये हैं-ब्रह्मपुराण, पद्मपुराण, विष्णुपुराण, शिवपुराण, लिङ्गपुराण, गरुड़पुराण, नारदपुराण, भागवतपुराण, अग्निपुराण, स्कन्दपुराण, भविष्यपुराण, ब्रह्मवैवर्तपुराण, मार्कण्डेय पुराण, वामनपुराण, वराहपुराण, मत्स्यपुराण, कूर्मपुराण और ब्रह्माण्डपुराण ये अठारह महापुराण हैं ॥
Q10. “भूतमात्रेन्द्रियार्थानां सम्भवः सर्ग उच्चते ।” इदं सर्गपरिभाषा कस्मिन् पुराणे ? [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2022]
अव्याकृतगुणक्षोभान्महतस्त्रिवृतोऽहमः
भूतसूक्ष्मेन्द्रियार्थानां सम्भवः सर्ग उच्यते ॥ श्रीमद्भागवत.12.7.12 ॥
लक्षणोंको विस्तारपूर्वक कहते हैं- अव्याकृत (अव्यक्तावस्था) प्रधानके गुणोंमें जब क्षोभ उत्पन्न होता है- तब उससे महत् तत्त्व उत्पन्न होता है-महत् तत्त्वसे त्रिविध अहङ्कार (तामस, राजस और वैकारिक) की उत्पत्ति होती है। त्रिविध अहङ्कारसे भूत, तन्मात्राएँ, इन्द्रिय, विषय एवं इन्द्रियाधिष्ठातृ देवताओंकी उत्पत्ति ‘सृष्टि’ नामसे कही जाती है ॥
Q11. भक्तिरसस्य आधारभूतं पुराणं किम् ? [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2022]
Q12. महापुराणेषु इदं नास्ति । [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2022]
यह उपपुराण है।
उपपुराण-
| 1. सनत्कुमार | 2. नारसिंह | 3. स्कान्द |
| 4. शिवधर्म | 5. आश्चर्य | 6. नारदीय |
| 7. कापिल | 8. कल्कि | 9. ओशनस |
| 10. ब्रह्माण्ड | 11. वारुण | 12. कालिका |
| 13. माहेश्वर | 14. साम्ब | 15. सौर |
| 16. पाराशर | 17. मारीच | 18. भार्गव |
Q13. गोपीगीतं श्रीमद्भागवतमहापुराणस्य कस्मिन् स्कन्धे विद्यते ? [MPPSC AP PRACYA SANSKRIT 2024]
Q14. ‘पुराण’ पदलक्षणे किं सम्मिलितं नास्ति ? [MPPSC AP SANSKRIT 2022]
“सर्गश्च प्रतिसर्गश्च वंशो मन्वन्तराणि च।
वंशानुचरितं चैव पुराणं पञ्चलक्षणम् ॥
Q15. ‘भारतीय विद्यानां विश्वकोषम्’ – इति रूपेण प्रसिद्धमस्ति [MPPSC AP SANSKRIT 2022]
- व्याकरण, काव्यशास्त्र और छन्द शास्त्र
- आयुर्वेद (चिकित्सा विज्ञान)
- ज्योतिष और राजनीति शास्त्र
- धनुर्वेद (युद्ध कला) और वास्तुशास्त्र
Q16. वैष्णवधर्मानुयायिनः कतमं पुराणं ‘पञ्चमोवेदः’ इति मन्यन्ते ? [MPPSC AP SANSKRIT 2022]
तत्र भागवतं पुण्यं पंचमं वेदसंमितम् ।
कथितं यत्त्वया पूर्व सर्वलक्षणसंयुतम् ॥॥श्रीमद्देवीभागवत. 1.2.16॥
Q17. ‘आदिपुराणम्’ इति नाम्ना आख्यातं पुराणम् – [MPPSC SET 2024]
Q18. ‘सत्यं परं धीमहि’ इति पङ्क्तिः कस्य पुराणस्य ? [MPPSC SET 2024]
जन्माद्यस्य यतोऽन्वयादितरतश्चार्थेष्वभिज्ञः स्वराट् तेने ब्रह्म हृदा य आदिकवये मुह्यन्ति यत् सूरयः।
तेजोवारिमृदां यथा विनिमयो यत्र त्रिसर्गोऽमृषा धाम्ना स्वेन सदा निरस्तकुहकं सत्यं परं धीमहि ॥ श्रीमद्भागवत.1.1.1 ॥
जिन परमेश्वरसे इस विश्वकी उत्पत्ति, स्थिति (पालन) तथा विनाश कार्य अन्वय (कारणकी कार्यमें स्थिति, जैसे-मिट्टीकी घटमें स्थिति) और उसके विपरीत व्यतिरेक (कारणका कार्यसे पृथक् भाव अर्थात् मिट्टीकी घटसे पृथक् स्थिति) रूपमें साधित होते हैं, जो जगत्के कर्त्ताके धर्मसे सम्पूर्ण रूपमें अवगत हैं, जिनमें स्वतःसिद्ध ज्ञान स्वयं विराजमान है, जिन्होंने आदि कवि ब्रह्माके हृदयमें सङ्कल्पके द्वारा तत्त्व-वस्तुको प्रकाशित किया है, जिन परमेश्वरके सम्बन्धमें ब्रह्मा, इन्द्र आदि देवता भी मोहमें पड़ जाते हैं; तथा जिस प्रकार तेज, जल और मिट्टीमें परस्पर एकके बदले दूसरी वस्तुका सत्यकी भाँति भ्रम होता है (अर्थात् जैसे तेजोमय सूर्यरश्मियोंमें जलका, जलमें स्थलका और स्थलमें जलका सत्यकी भाँति भ्रम होता है), उसी प्रकार जिन परमेश्वरमें सत्त्व, रजः और तमः गुणोंका अवस्थान सत्यकी भाँति प्रतीत होनेपर भी वस्तुतः जिनमें जड़धर्म सम्भव ही नहीं है, जो माया और मायाके कार्य-कपटतासे सर्वदा मुक्त हैं, समस्त जीवोंके हृदयमें विराजित तथा सर्वदेशकालवर्ती उन्हीं सत्यस्वरूप-लक्षणमय परमेश्वरका हम ध्यान करते हैं।
Q19. उड़ीसाप्रदेशे स्थितस्य कोणादित्यस्य (कोणार्कस्य) तीर्थस्य वर्णनं कस्मिन् पुराणे प्राप्यते ? [RPSC AP SANSKRIT II 2025]
कोणादित्य इति ख्यातस्तस्मिन्देशे व्यवस्थितः ।
यं दृष्ट्वा भास्करं मर्त्यः सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ ब्रह्म. 28.9।
Q20.यस्मात्पुरा ह्यभूच्चैतत्पुराणं तेन तत्स्मृतम् ।
निरुक्तमस्य यो वेद सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ इति कुत्रोक्तम्?[UGC NET 73 CODE sept 2024]
यस्मात्पुरा ह्यभूच्चैतत्पुराणं तेन तत्स्मृतम् ।
निरुक्तमस्य यो वेद सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥ब्रह्माण्ड. 1.1.173॥
- यस्मात्पुरा ह्यभूच्चैतत् – चूँकि यह ज्ञान प्राचीन काल में (पुरा) सबसे पहले प्रकट हुआ था, इसलिए इसे ‘पुराण’ कहा गया।
- निरुक्तमस्य यो वेद – जो व्यक्ति ‘पुराण’ शब्द की इस वास्तविक व्युत्पत्ति और अर्थ को जानता है।
- सर्वपापैः प्रमुच्यते –वह मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है।
Q21. सर्गश्चाथ विसर्गश्च वृत्तिः रक्षान्तराणि च ।
वंशो वंशानुचरितं संस्था हेतुरपाश्रयः ॥ इति पुराणलक्षणं कुत्रोक्तम्?[UGC NET 73 CODE sept 2024]
सर्गश्चाथ विसर्गश्च वृत्तिः रक्षान्तराणि च ।
वंशो वंशानुचरितं संस्था हेतुरपाश्रयः ॥॥श्रीमद्भागवत.12.7.9॥
Q22. श्रीमद्भागवते पुराणस्य मुक्त्याख्यं लक्षणं कस्मिन् स्कन्धे समन्वेति? [UGC NET 73 CODE sept 2024]
- प्रथमः स्कन्धः: अधिकारि-निर्णयः (शौनकादिऋषीणां प्रश्नः, व्यास-नारद-संवादः)।
- द्वितीयः स्कन्धः: साधन-लक्षणम् (सर्गस्य बीजम्, विराट्सूत्रम्)।
- तृतीयः स्कन्धः: सर्गः (पञ्चभूत-तन्मात्रादीनां प्राथमिकसृष्टिः)।
- चतुर्थः स्कन्धः: विसर्गः (ब्रह्मणः चराचरजीवसृष्टिः)।
- पञ्चमः स्कन्धः: स्थानम् (वैकुण्ठविजयः, ब्रह्माण्ड-भूगोलवर्णनम्)।
- षष्ठः स्कन्धः: पोषणम् (भगवतः अनुग्रहः, अजामिलोपाख्यानम्)।
- सप्तमः स्कन्धः: ऊतिः (कर्मवासना, प्रह्लादचरितम्)।
- अष्टमः स्कन्धः: मन्वन्तरम् (मनूनां कालः, गजेन्द्रमोक्षः)।
- नवमः स्कन्धः: ईशानुचरितम् (राजवंशावली, रामावतारः)।
- दशमः स्कन्धः: निरोधः (अथवा आश्रयः – श्रीकृष्णस्य लीलाः)।
- एकादशः स्कन्धः: मुक्तिः (उद्धवगीता, आत्मज्ञानम्)।
- द्वादशः स्कन्धः: आश्रयः (अथवा संस्था – प्रलयः, कलिधर्मः)।
Q24. अधोलिखितेषु श्रीमद्भागवतपुराणेन सह सम्बद्धाः न भवन्ति-[UGC NET 73 CODE sept 2024]
A. गजेन्द्रमोक्षः
B. ध्रुवचरितम्
C. दुर्गासप्तशती
D. अम्बरीषोपाख्यानम्
E. तुलसीचरित्रम्
समीचीनं विकल्पं चिनुत।
- दुर्गासप्तशती (Durga Saptashati), जिसे ‘देवी माहात्म्य’ या ‘चण्डी पाठ’ भी कहा जाता है, मार्कण्डेय पुराण का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अंश है।
- तुलसी विवाह (तुलसी और शालिग्राम का विवाह) की विस्तृत कथा मुख्य रूप से पद्म पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण में मिलती है।
Q25. राजा बलि के लोक का नाम है –
Q26. श्रीमद्भागवतपुराणे कति स्कन्धाः सन्ति ? [RPSC AP SANSKRIT II 2025]
Q27. पुराण-साहित्यानुसारम् अष्टमं मन्वन्तर-नामधेयं किम् ?[RPSC AP SANSKRIT II 2025]
Q28. जम्बूद्वीप को कहा जाता है-
Q29. अनापलिंग-कूस्कानि पुराणानि कतिसंख्यकानि ? [RPSC AP SANSKRIT II 2025]
अ- 1. अग्नि पुराण
ना- 2-नारद पुराण
प- 3-पद्म पुराण
लिं- 4-लिङ्ग पुराण
ग- 5-गरुड पुराण
कू- 6-कूर्म पुराण
स् 7-स्कन्द पुराण
Q30. ‘दुर्गा सप्तशती’ कस्मिन् पुराणे मिलति ? [RPSC AP SANSKRIT II 2025]
आशा है कि आपको पुराण बहुविकल्पीय प्रश्न Puran MCQs उपयोगी और जानकारीपूर्ण लगा होगा। ऐसी ही उपयोगी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जुड़े रहें gopath.in & boks.in के साथ आपका सहयोग और विश्वास ही हमारी प्रेरणा है।