श्वेताश्वतर एवं ईशोपनिषद् बहुविकल्पीय प्रश्न Part-3

प्रिय विद्यार्थियों, इस पोस्ट में श्वेताश्वतर एवं ईशोपनिषद् बहुविकल्पीय प्रश्न Part-3 है। जो संस्कृत की विविध प्रतियोगी परिक्षाओं NET JRF, TGT PGT तथा विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Q1. ईशोपनिषद् के अनुसार मनुष्य को कितने वर्षों तक कर्म करते हुए जीने की इच्छा करनी चाहिए?

क). 50 वर्ष

ख). 100 वर्ष

ग). 120 वर्ष

घ). 80 वर्ष

✅ सही उत्तर:- ख). 100 वर्ष

Q2. “असूर्या नाम ते लोका अन्धेन तमसाऽवृताः” – यहाँ “असूर्या” शब्द का अर्थ क्या है?

क). देवताओं के लोक

ख). प्रकाशमय लोक

ग). अधर्मियों के लोक

घ). ब्रह्मलोक

✅ सही उत्तर:- ग). अधर्मियों के लोक

Q3. श्वेताश्वतरोपनिषद् किस वेद के अन्तर्गत है-

क). ऋग्वेद

ख). कृष्णयजुर्वेद

ग). शुक्लयजुर्वेद

घ). सामवेद

✅ सही उत्तर:- ख). कृष्णयजुर्वेद

Q4. उपनिषदों पर विस्तृत भाष्य लिखने वाले प्रमुख आचार्य कौन माने जाते हैं?

क). रामानुजाचार्य

ख). मध्वाचार्य

ग). आदि शंकराचार्य

घ). कुमारिल भट्ट

✅ सही उत्तर:- ग). आदि शंकराचार्य

Q5. “एको हि रुद्रो न द्वितीयाय…” पंक्ति को पूर्ण करें-

क). संसृज्य विश्वा भुवनानि गोपा:

ख). तस्थुर्य इमॉल्लोकानीशत ईशनीभि:

ग). सं बाहुभ्यां धमति संपतत्रै

घ). द्यावाभूमी जनयन्देव एक:

✅ सही उत्तर:- ख). तस्थुर्य इमॉल्लोकानीशत ईशनीभि:

Q6. उपनिषदों का अंग्रेजी में सम्पादन एवं अनुवाद करने वाले प्रमुख विद्वान कौन थे?

क). मैक्स मूलर

ख). विलियम जोन्स

ग). चार्ल्स विल्किन्स

घ). एच टी कोलब्रुक

✅ सही उत्तर:- क). मैक्स मूलर

Q7. ब्रह्म का चक्ररूप से वर्णन में कितने अष्टक हैं-

क). 6

ख). 8

ग). 10

घ). 12

✅ सही उत्तर:- क). 6

Q8. ईशोपनिषद् के अनुसार मनुष्य को कैसे जीना चाहिए?

क). कर्म त्याग करके

ख). केवल ध्यान करके

ग). कर्म करते हुए

घ). केवल भोग करते हुए

✅ सही उत्तर:- ग). कर्म करते हुए

Q9. किसका ज्ञान होने पर जीव समस्त पाशों से मुक्त हो जाता है-

क). परमात्मा

ख). दुःख

ग). राग

घ). द्वेष

✅ सही उत्तर:- क). परमात्मा

Q10. उपनिषदों की रचना का काल सामान्यतः किस अवधि में माना जाता है?

क). वैदिक उत्तरकाल (लगभग 800-500 ई.पू.)

ख). मौर्यकाल

ग). गुप्तकाल

घ). मध्यकाल

✅ सही उत्तर:- क). वैदिक उत्तरकाल

Q11. श्वेताश्वतरोपनिषद् के वक्ता हैं-

क). श्वेताश्वतर

ख). जाबाल

ग). नारद

घ). पिङ्गल

✅ सही उत्तर:- क). श्वेताश्वतर

Q12. “यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मन्येवानुपश्यति” मंत्र का मुख्य संदेश क्या है?

क). संसार से विरक्ति

ख). आत्मा की सर्वव्यापकता

ग). कर्म का त्याग

घ). देवपूजा

✅ सही उत्तर:- ख). आत्मा की सर्वव्यापकता

Q13. श्वेताश्वतरोपनिषद् में कुल अध्यायों की संख्या है-

क). 4

ख). 5

ग). 6

घ). 7

✅ सही उत्तर:- ग). 6

Q14. “अजामेकां लोहितशुक्लकृष्णां…” यह उक्ति अधोलिखित में से किसके विषय में कही गयी है?

क). पुरुष

ख). प्रकृति

ग). ब्रह्म

घ). माया

✅ सही उत्तर:- ख). प्रकृति

Q15. ब्रह्म का नदीरूप से वर्णन में कितने जल स्रोत हैं-

क). 4

ख). 5

ग). 6

घ). 7

✅ सही उत्तर:- ख). 5

Q16. “स पर्यगाच्छुक्रमकायमव्रणम्” मंत्र में ब्रह्म का कौन-सा गुण बताया गया है?

क). साकार

ख). देहधारी

ग). सर्वव्यापक और निराकार

घ). नश्वर

✅ सही उत्तर:- ग). सर्वव्यापक और निराकार

Q17. श्वेताश्वतरोपनिषद् के प्रथम अध्याय में कुल कितने मन्त्र हैं-

क). 12

ख). 14

ग). 15

घ). 16

✅ सही उत्तर:- घ). 16

Q18. “यस्मिन्सर्वाणि भूतान्यात्मैवाभूद्विजानतः” मंत्र के अनुसार ज्ञानी पुरुष के लिए क्या परिणाम होता है?

क). वह दुखी होता है

ख). उसे मोह और शोक नहीं होता

ग). उसे संसार का भय होता है

घ). वह कर्म त्याग देता है

✅ सही उत्तर:- ख). उसे मोह और शोक नहीं होता

Q19. उपनिषद् के अनुसार, आत्मा (आत्मन्) का क्या स्वभाव है?

क). जन्म और मरण

ख). शाश्वत और अमर

ग). केवल शरीर के साथ सीमित

घ). रूप और रंग से बंधा

✅ सही उत्तर:- ख). शाश्वत और अमर

Q20. “अनादिमत्वे विभुत्वेन वर्तसे…” इस पंक्ति को पूर्ण करें-

क). यतो जातानि भुवनानि विश्वा

ख). त्वं स्त्री त्वं पुमानसि

ग). अजो ह्येको जुषमाणोऽनुशेते

घ). समानं वृक्षं परिषस्वजाते

✅ सही उत्तर:- क). यतो जातानि भुवनानि विश्वा

नीलः पतङ्गो हरितो लोहिताक्ष-स्तडिद्गर्भ ऋतवः समुद्राः ।
अनादिमत्त्वं विभुत्वेन वर्तसे यतो जातानि भुवनानि विश्वा ॥ 4.4॥

Q21. “यो देवानां प्रभवोद्भवश्च विश्वाधिपो…” इस मन्त्र में किस देवता का वर्णन है?

क). इन्द्र

ख). माया

ग). रुद्र

घ). द्यावेव वरुण देव

✅ सही उत्तर:- ग). रुद्र

Q22. उपनिषदों का मुख्य संदेश क्या है?

क). केवल यज्ञ करना

ख). आत्मा और ब्रह्म की एकता का ज्ञान

ग). राज्य संचालन की नीति

घ). युद्ध का महत्त्व

✅ सही उत्तर:- ख). आत्मा और ब्रह्म की एकता का ज्ञान

Q23. “विश्वस्मैक परिवेष्टितारमीशं तं ज्ञात्वामृता भवन्ति” इस मन्त्र के द्वारा ‘तं’ पद से किसे परिभाषित किया है?

क). ब्रह्मम्

ख). जालवान्

ग). हिरण्यगर्भम्

घ). पुरुषम्

✅ सही उत्तर:- क). ब्रह्मम्

Q24. उपनिषदों के अनुसार जीव (आत्मा) का वास्तविक स्वरूप क्या है?

क). नश्वर और शरीर के समान

ख). केवल मन का एक भाग

ग). ब्रह्म का अंश तथा अमर

घ). केवल इन्द्रियों का समूह

✅ सही उत्तर:- ग). ब्रह्म का अंश तथा अमर

Q25. निम्न में से “निकाय” शब्द का अर्थ क्या है?

क). देह

ख). काय

ग). शरीर

घ). तनू

✅ सही उत्तर:- ग). शरीर

Q26. परम्परागत रूप से उपनिषदों की संख्या कितनी मानी जाती है?

क). 18

ख). 51

ग). 108

घ). 200

✅ सही उत्तर:- ग). 108

Q27. “अपाणिपादो जवनो ग्रहीता…” उक्त पंक्ति किसके विषय में है?

क). मनस

ख). इन्द्रिय

ग). परमात्मा

घ). बुद्धि

✅ सही उत्तर:- ग). परमात्मा

Q28. उपनिषदों पर प्रसिद्ध टीका किस आचार्य ने लिखी है?

क). रामानुजाचार्य

ख). मध्वाचार्य

ग). आदि शंकराचार्य

घ). पतंजलि

✅ सही उत्तर:- ग). आदि शंकराचार्य

Q29. ईशोपनिषद् के प्रथम 10 मंत्रों का मुख्य दार्शनिक विषय क्या है?

क). केवल कर्मकाण्ड

ख). भक्ति मार्ग

ग). कर्म और ज्ञान का समन्वय

घ). केवल संन्यास

✅ सही उत्तर:- ग). कर्म और ज्ञान का समन्वय

Q30. उपनिषदों का मुख्य स्वरूप किस विषय पर आधारित है?

क). कर्मकाण्ड

ख). भक्ति

ग). ब्रह्मविद्या

घ). इतिहास

✅ सही उत्तर:- ग). ब्रह्मविद्या

आशा है कि आपको श्वेताश्वतर एवं ईशोपनिषद् बहुविकल्पीय प्रश्न Part-3 उपयोगी और जानकारीपूर्ण लगा होगा। ऐसी ही उपयोगी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जुड़े रहें gopath.in & boks.in के साथ आपका सहयोग और विश्वास ही हमारी प्रेरणा है।

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