श्वेताश्वतरोपनिषद् बहुविकल्पीय Shwetaswataropnishad MCQs

प्रिय विद्यार्थियों, इस पोस्ट में श्वेताश्वतरोपनिषद् बहुविकल्पीय Shwetaswataropnishad MCQs है। जो संस्कृत की विविध प्रतियोगी परिक्षाओं NET JRF, TGT PGT तथा विश्वविद्यालय स्तरीय परीक्षाओं के लिए अत्यंत उपयोगी है।

Q1. श्वेताश्वतरोपनिषद् के अनुसार जगत् का कारण है?

क). काल

ख). नियति

ग). भूत

घ). परमात्मा

✅ सही उत्तर:- घ). परमात्मा

Q2. कौन काल से लेकर आत्मापर्यन्त समस्त कारणों का अधिष्ठान है?

क). नियति

ख). परमात्मा

ग). यदृच्छा

घ). काल

✅ सही उत्तर:- ख). परमात्मा

Q3. श्वेताश्वतरोपनिषद् के प्रथम अध्याय में कितने मंत्र हैं?

क). 15

ख). 14

ग). 16

घ). 17

✅ सही उत्तर:- ग). 16

Q4. तमेकनेमिं त्रिवृतं षोडशान्तं …….. में त्रिवृतं का तात्पर्य है –

क). सत्व, रज, तम

ख). प्रकृति,पुरुष, इन्द्रिय

ग). वात, पित्त, कफ

घ). ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद

✅ सही उत्तर:- क). सत्व, रज, तम

शांकरभाष्य :- त्रिवृतं त्रिभिः सत्त्वरजस्तमोभिः प्रकृतिगुणैर्वृतम्।

Q5. ‘मा गृधः कस्यस्विद्धनम्’ इति कुत्र अस्ति?

क). कठोपनिषदे

ख). ईशोपनिषदे

ग). केनोपनिषदे

घ). मुण्डकोपनिषदे

✅ सही उत्तर:- ख). ईशोपनिषदे

ॐ ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् ।
तेन त्यक्तेन भुञ्जीथा मा गृधः कस्यस्विद्धनम् ॥ १ ॥

जगत्‌ में जो कुछ स्थावर-जंगम संसार है वह सब ईश्वर के द्वारा आच्छादनीय है [अर्थात् उसे भगवत्स्वरूप अनुभत्र करना चाहिये ] । उसके त्याग-भाव से तू अपना पालन कर; किसी के धन की इच्छा न कर ॥ १॥

Q6. यस्तु सर्वाणि भूतानि आत्मनि एव अनुपश्यति सर्वभूतेषु च आत्मानं ततो न विजुगुप्सते इति मंत्र उपलभ्यते ?

क). कठोपनिषद्

ख). ईशोपनिषद्

ग). केनोपनिषद्

घ). तैत्तिरीयोपनिषद्

✅ सही उत्तर:- ख). ईशोपनिषद्

यस्तु सर्वाणि भूतान्यात्मन्येवानुपश्यति ।
सर्वभूतेषु चात्मानं ततो न विजुगुप्सते ॥ ६॥

जो [ साधक ] सम्पूर्ण भूतों को आत्मा में ही देखता है और समस्त भूतों में भी आत्मा को ही देखता है वह इस [ सार्वात्म्यदर्शन ] के कारण ही किसी से घृणा नहीं करता ॥ ६ ॥

Q7. श्वेताश्वतरोपनिषद् के प्रथम अध्याय में उद्धृत ‘शतार्धारं’ का अर्थ है।

क). १०० अरे

ख). १५० अरे

ग). ५० अरे

घ). २५० अरे

✅ सही उत्तर:- ग). ५० अरे

Q8. नदी स्वरूप का वर्णन है –

क). कार्यरूप ब्रह्म के द्वारा

ख). कारणरूप ब्रह्म के द्वारा

ग). कार्यरूप प्रकृति के द्वारा

घ). कारणरूप प्रकृति के द्वारा

✅ सही उत्तर:- क). कार्यरूप ब्रह्म के द्वारा

शांकरभाष्य :- तत्र प्रथमेन मन्त्रेण (तमेकनेमिम इति) सर्वात्मानं ब्रह्म चक्रं दर्शयति, द्वितीयेन (पञ्चस्त्रीतोऽम्बुं इति) नदीरूपेण।
एवं तावन्नदीरूपेण ब्रह्म चक्ररूपेण च कार्यकारणात्मकं ब्रह्म सप्रपञ्चमिहाभिहितम्।

Q9. श्वेताश्वतरोपनिषद् में हंस से तात्पर्य है –

क). ब्रह्म

ख). प्राणी

ग). जीव

घ). प्रकृति

✅ सही उत्तर:- ग). जीव

नवद्वारे पुरे देही हंसो लेलायते बहिः ।
वशी सर्वस्य लोकस्य स्थावरस्य चरस्य च ॥ 3.18॥

शांकरभाष्य :- हंसः परमात्मा।

Q10. “उद्गीतमेतत्परमं ब्रह्म तस्मिंत्रयं सुप्रतिष्ठाक्षरं च।अत्रान्तरं ब्रह्मविदो विदित्वा लीना ब्रह्मणि तत्परा योनिमुक्ताः ॥1.7॥” में ‘त्रयं’ पद से तात्पर्य है –

क). सत्व, रज, तम

ख). भोक्ता, भोग्य, नियन्ता

ग). वात, पित्त, कफ

घ). ह्रस्व, दीर्घ, प्लुत

✅ सही उत्तर:- ख). भोक्ता, भोग्य, नियन्ता

शांकरभाष्य :- त्रयं प्रतिष्ठितं भोक्ता भोग्यं प्रेरितारमिति वक्ष्यमाणं भोग्यभोक्तृनियन्तृलक्षणम्।

Q11. श्वेताश्वतरोपनिषद् में अध्याय हैं –

क). ६

ख). ७

ग). ५

घ). ८

✅ सही उत्तर:- क). ६

Q12. श्वेताश्वतरोपनिषद् क्षर कहा जाता है –

क). प्रधान (मूल प्रकृति)

ख). पुरुष (जीवात्मा)

ग). ब्रह्म (परमात्मा)

घ). महत् (बुद्धि)

✅ सही उत्तर:- क). प्रधान (मूल प्रकृति)

क्षरं प्रधानम् अमृताक्षरं हरः ………. ॥१.१०॥

Q13. किसे अरणी के समान कहा जा रहा है?

क). स्वदेह को

ख). ब्रह्म को

ग). प्रणव को

घ). प्रकृति को

✅ सही उत्तर:- क). स्वदेह को

स्वदेहम् अरिणं कृत्वा प्रणवं चोत्तरारणिम्।
ध्याननिर्मथनाभ्याछेतं पश्येन्निगूढवत्॥१४॥

Q14. श्वेताश्वतरोपनिषद् का प्रथम अध्याय प्रसिद्ध है –

क). सांख्य विवेचन के लिए

ख). न्याय विवेचन के लिए

ग). योग विवेचन के लिए

घ). मीमांसा विवेचन के लिए

✅ सही उत्तर:- क). सांख्य विवेचन के लिए

Q15. “आत्मा वा अरे दृष्टव्यः श्रोतव्यो मन्तव्यो निदिध्यासितव्यो मैत्रेयि” वाक्यमिदं वर्त्तते – [MPPSC SSANSKRIT SET 2024]

क). छान्दोग्योपनिषदि

ख). बृहदारण्यकोपनिषदि

ग). श्वेताश्वतरोपनिषदि

घ). तैत्तिरीयोपनिषदि

✅ सही उत्तर:- ख). बृहदारण्यकोपनिषदि

Q16. शांकरभाष्य तमेकनेमिं त्रिवृतं षोडशान्तं से तात्पर्य नहीं है –

क). पञ्चज्ञानेन्द्रियकर्मेन्द्रिय, पञ्चमहाभूत

ख). षोडशकला

ग). चौदह भुवन, विराट व सूत्रात्मा

घ). चतुर्दशविद्यास्थान, रामायण, महाभारत

✅ सही उत्तर:- [O]घ). चतुर्दशविद्यास्थान, रामायण, महाभारत

शांकरभाष्य :- त्रिवृतं त्रिभिः सत्त्वरजस्तमोभिः प्रकृतिगुणैर्वृतम्।

षोडशको विकारः पञ्च भूतान्येकादशेन्द्रियाण्यन्तोऽवसानं विस्तारसमाप्तिर्यस्यात्मनस्तं षोडशान्तम् । अथवा प्रश्नोपनिषदि “यस्मिन्नेताः षोडश कलाः प्रभवन्ति” (६।२) इत्यारभ्य
“स प्राणमसृजत प्राणाच्छूद्धाम्” (६।४) इत्यादिना प्रोक्ता नामान्ताः षोडशकला अवसानं यस्येति । अथवैकनेमिमिति कारणभूताव्याकृतावस्थाभिहिता ।
तत्कार्यसमष्टि भूतविराट्सूत्रद्वयं तद् व्यष्टिभूतभूरादिचतुर्दशभुवनान्यन्तोऽवसानं यस्य प्रपञ्चात्मनावस्थितस्य तं षोडशान्तम् ।

प्रश्नोपनिषद्‌के षष्ठ प्रश्नमें निम्नलिखित सोलह कलाएँ बतायी हैं- प्राण, श्रद्धा, आकाश, वायु, तेज, जल, पृथिवी, इन्द्रिय, मन, अन्न, वीर्य, तप, मन्त्र, कर्म, लोक और नाम। वहाँ ‘कला’ शब्दका अर्थ इस प्रकार है- ‘कं ब्रह्म लीयते आच्छाद्यते यया, सा कला।’ अर्थात् जिसके द्वारा क (ब्रह्म) लीन (ढका हुआ) है उसे कला कहते हैं। इन्होंने ब्रह्मके पारमार्थिक स्वरूपको ढक रखा है, इसलिये ये कलाएँ हैं।

Q17. छान्दोग्योपनिषत् केन वेदेन सम्बद्धा ?

क). कृष्णयजुर्वेदेन

ख). शुक्लयजुर्वेदेन

ग). सामवेदेन

घ). ऋग्वेदेन

✅ सही उत्तर:- ग). सामवेदेन

Q18. ‘उपनिषादयति सर्वानर्थकरं संसारं विनाशयति’  उपनिषदः व्युत्पतिरियं केन प्रदत्ता ? – [RPSC AP YAJURVEDA 2024]

क). शंकराचार्येण

ख). स्कन्दस्वामिना

ग). दयानन्देन

घ). सायणेन

✅ सही उत्तर:-क). शंकराचार्येण

उपनिषादयति सर्वानर्थकरं संसारं विनाशयति।
संसारकारणभूतामविद्यां च शिथिलयति, ब्रह्म च गमयति।।
(ईशावास्योपनिषद् भाष्य)
अर्थात् सभी अनर्थों को उत्पन्न करने वाले संसार का यह विनाश करती है, संसार के हेतु स्वरूप अविद्या को शिथिल करती है और ब्रह्म की प्राप्ति करवाती है।

Q19. ‘उपनिषद्’ इत्यत्र प्रत्ययः विद्यते – [RPSC AP YAJURVEDA 2024]

क). क्विप्

ख). क्विन्

ग). विच्

घ). विन्

✅ सही उत्तर:- क). क्विप्

Q20. ………… स्वगुणैर्निगूढाम् ।

क). परमात्मशक्तिं

ख). देवात्मशक्तिं

ग). पुरुषशक्तिं

घ). देवशक्तिं

✅ सही उत्तर:- ख). देवात्मशक्तिं

आशा है कि आपको श्वेताश्वतरोपनिषद् बहुविकल्पीय Shwetaswataropnishad MCQs उपयोगी और जानकारीपूर्ण लगा होगा। ऐसी ही उपयोगी जानकारी और मार्गदर्शन के लिए जुड़े रहें gopath.in & boks.in के साथ आपका सहयोग और विश्वास ही हमारी प्रेरणा है।

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